शुक्रवार को आईएआरआई में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करते उपराष्ट्रपति धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि शिक्षा को देश की प्रगति के लिए अनुसंधान और नवाचार के साथ-साथ उद्यमशीलता का केंद्र बनना चाहिए।
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने शुक्रवार को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के स्नातकोत्तर विद्यालय के 61वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि देश की प्रगति में अन्नदाता का अहम रोल रहा है। 80 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मुफ्त भोजन सुनिश्चित करना आसान कार्य नहीं था। वह भी ऐसे समय में जब दुनिया महामारी से जूझ रही थी। उन्होंने कहा आज जिस भारत को हम देख रहे हैं, वह अद्भुत है।
उपराष्ट्रपति ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में चिन्हित करने की दिशा में भारत के प्रयासों व दुनियाभर में कृषि क्षेत्र के लिए इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ड्रोन सहित कृषि में अत्याधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ टेक्नोलॉजी इस क्षेत्र को बदल रही है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पहल के तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों को 2.20 लाख करोड़ रु. से अधिक राशि सीधे उनके बैंक खातों में बिना बिचौलियों के हस्तांतरित की गई हैं।
उपराष्ट्रपति ने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए कहा कि यह संवाद, बहस, चर्चा, विचार-विमर्श के लिए है, जो व्यवधान या अशांति का मंच नहीं बनना चाहिए। संसद में बोला गया हर शब्द उचित विचार के बाद आना चाहिए।
दीक्षांत समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति धनखड़ के साथ ही केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मेधावी छात्रों को मेरिट पदक व पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने अनाज, फल-सब्जियों की 16 विभिन्न किस्मों को भी जारी किया।
इस मौके पर डेयर के सचिव व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, उपराष्ट्रपति के सचिव सुनील कुमार गुप्ता, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कुलपति व निदेशक डॉ. ए.के. सिंह, अधिष्ठाता व संयुक्त निदेशक (शिक्षा) डॉ. अनुपमा सिंह सहित अन्य अधिकारी, विद्यार्थी तथा अभिभावक, किसानबंधु उपस्थित थे। समारोह में 402 छात्र-छात्राओं ने डिग्रियां प्राप्त की गईं, जिनमें विदेशी विद्यार्थी भी शामिल रहे।