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समलैंगिक विवाह भारतीय संस्कृति नहीं, सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक लगाए : स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती

काशी सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती

समलैंगिक विवाह को क़ानूनी मान्यता दिलाने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर काशी के संतों ने नाराजगी जताई है।संतों ने सुप्रीम कोर्ट से इन याचिकाओं पर तत्काल रोक लगाने और इन्हें खारिज करने की मांग की है।

अस्सी डुमरावबाग कॉलोनी स्थित काशी सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि समलैंगिक शादी भारतीय संस्कृति नहीं है। इससे समाज का ताना-बाना बिगड़ेगा और समाज का पतन भी होगा। स्वामी नरेन्द्रानंद ने समलैंगिक शादी के दुष्परिणाम को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समलैंगिक विवाह प्राचीन भारतीय संस्कृति और व्यवस्था के विरुद्ध है। इसे कानूनी मान्यता कदापि नहीं दिया जाना चाहिए। यह निंदनीय और सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक व्यवस्था के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि सनात्तनी व्यवस्था के साथ अन्य धर्मो में दो विपरीत लिंग के बीच ही विवाह का उल्लेख है। इसी आधार पर भारत का समाज विकसित हुआ है।

गौरतलब हो कि सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक शादी को क़ानूनी मान्यता दिलाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं। उच्चतम न्यायालय इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रही है। संविधान पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ताओं का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश कर रहे हैं।

खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने इस सुनवाई का विरोध करते हुए कहा कि नए सामाजिक संबंधों पर फ़ैसला करने का हक़ केवल संसद को है। याचिकाकर्ता इस देश के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने वर्ष 2018 में समलैंगिक रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाला ऐतिहासिक फ़ैसला दिया था।

- संतों ने काशी में मदिरा और मांस के बिक्री का विरोध किया

अस्सी डुमरावबाग स्थित काशी सुमेरूपीठ में शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती के नेतृत्व में संतों और दंडी स्वामियों ने बाबा विश्वनाथ की नगरी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र को मदिरा और मांस की बिक्री से मुक्त करने की मांग की।

संतों ने बैठक कर कहा कि मठ मंदिरों का बिजली, गृह और जलकर माफ होना चाहिए। संतों ने कहा कि नगर निकाय चुनाव में लड़ रहे प्रत्याशियों को इसको अपने संकल्प पत्र में शामिल करना चाहिए। स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि काशी पंचकोशी यात्रा के मध्य मांस मदिरा प्रतिबंधित होनी ही चाहिए।

बैठक में स्वामी दुर्गेशानन्द तीर्थ, स्वामी महादेव आश्रम, स्वामी इन्द्रदेव आश्रम, स्वामी इन्द्रप्रकाश आश्रम, स्वामी राधेश्याम आश्रम, स्वामी गोविन्ददेव आश्रम, स्वामी रणछोड़ जी महाराज आदि भी मौजूद रहे।

AUTHOR :Parul Kumari

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