सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक रेप को अपराध के दायरे में रखने के मसले पर 9 मई को सुनवाई करेगा
सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक रेप को अपराध के दायरे में रखने के मसले पर 9 मई को सुनवाई करेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने आज इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन किया, जिसके बाद कोर्ट ने 9 मई को सुनवाई करने का आदेश दिया।
केंद्र सरकार ने कहा कि वह जल्द से जल्द इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करेगी। 16 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट को ये तय करना है कि पति का पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाना रेप है कि नहीं।
11 मई 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक रेप के मामले पर विभाजित फैसला दिया था। जस्टिस राजीव शकधर ने जहां आईपीसी की धारा 375 के अपवाद को असंवैधानिक करार दिया था, वहीं जस्टिस सी हरिशंकर ने इसे सही करार दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि उसका ये रुख नहीं है कि आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 को हटाया जाए या रखा जाए। केंद्र सरकार अपना रुख संबंधित पक्षों से मशविरा के बाद ही तय करेगी।
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने वैवाहिक रेप को अपराध बनाने की मांग की थी। गोंजाल्वेस ने ब्रिटेन के लॉ कमीशन का हवाला देते हुए वैवाहिक रेप को अपराध बनाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यौन संबंध बनाने की इच्छा पति-पत्नी में से किसी पर भी नहीं थोपी जा सकती है। यौन संबंध बनाने का अधिकार कोर्ट के जरिये भी नहीं दिया जा सकता है।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले के एमिकस क्युरी रेबेका जॉन ने कहा था कि आईपीसी की धारा 375 के अपवाद को बरकरार रखा जाना संवैधानिक नहीं होगा। आईपीसी की धारा 498ए, 304बी और घरेलू हिंसा अधिनियम और अन्य नागरिक उपचार सहित विभिन्न कानूनी प्रावधान धारा 375 के तहत रेप से निपटने के लिए अपर्याप्त हैं।