गणपति की मूर्ति रखने से पहले जान लें ये 10 वास्तु नियम, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियाँ..
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ माना जाता है। लोग अपने घर, दुकान और ऑफिस में गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर इसलिए लगाते हैं ताकि जीवन से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर हों और घर में खुशियाँ बनी रहें। ऐसा माना जाता है कि घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर गणेशजी की उपस्थिति सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाती है। यही वजह है कि लोग गणपति की मूर्ति उपहार में भी देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र में गणेशजी की मूर्ति रखने बहुत नियम है।
घर में गणेशजी की मूर्ति रखने से पहले यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि वह किस प्रकार की हो और कहाँ रखी जाए। वास्तु के अनुसार, सही जगह और सही रूप में रखी मूर्ति घर में सुख-समृद्धि लाती है, जबकि गलत तरीके से रखने पर कलह, मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी भी आ सकती है।
इन जगहों पर भूलकर भी गणेशजी की मूर्ति न रखें।
1. बाथरूम या शौचालय के पास गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर रखना बहुत अशुभ माना जाता है।
2. शयनकक्ष में गणपति की मूर्ति रखने से पति-पत्नी के रिश्ते में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।
3. मूर्ति को हमेशा साफ़ जगह पर रखना चाहिए, गंदे या अंधेरे कोने में नहीं।
4 . घर में भगवान गणेश की नृत्य करती हुई मूर्ति रखना सही नहीं माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे परिवार में कलह और अशांति बढ़ती है।
5 . किसी को ऐसी मूर्ति उपहार में देना भी अशुभ होता है क्योंकि इससे उनके जीवन में भी कलह आ सकती है।
6 . घर में गणेश जी की वाममुखी (बाईं सूंड वाली) मूर्ति रखना सबसे शुभ माना जाता है। इसे रखने से घर में सुख, शांति और उन्नति बनी रहती है।
7. दक्षिणाभिमुखी (दाईं सूंड वाले) गणपति की पूजा के विशेष नियम हैं। यदि पूजा विधिपूर्वक न की जाए, तो परिणाम विपरीत हो सकते हैं।
8 . संतान सुख की कामना रखने वालों के लिए बाल स्वरूप गणेश जी की मूर्ति अत्यंत शुभ मानी जाती है।
9 . करियर और व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए घर में सिंदूरी स्वरूप गणपति की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए।
10. घर में प्रवेश करते ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए मुख्य द्वार पर मूषक वाहन वाले गणेश जी की मूर्ति रखना लाभकारी होता है।