पटना बुक फेयर में 15 करोड़ की किताब, छपी मात्र 16 प्रति....
कई ऐसी किताबें आई जिन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। लेकिन भारत में इन दिनों एक 15 करोड़ की किताब चर्चा का विषय बनी हुई है। पटना पुस्तक मेले में 'मैं' नाम की रविवार (07 दिसंबर) को सबसे चर्चित आकर्षण बनी। वहीं अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे महंगी किताब है।
किताब के लेखक रत्नेश्वर रविवार को खुद गांधी मेले में थे। उन्होंने कहा, 408 पन्नों की इस किताब की मात्र 16 किताबें छपी हैं। आठ अंग्रेजी और आठ हिंदी में है. तीन किताबों को ही पूरी दुनिया में बेचा जाएगा, बाकी 13 में दो पुस्तकें केंद्र में स्थापित की जाएंगी। रत्नेश्वर ने आगे इस पुस्तक को उन्होंने ब्रह्ममुहूर्त में मात्र 3 घंटे 24 मिनट में लिखा।
रत्नेश्वर के अनुसार, 6–7 सितंबर 2006 की रात लिखते समय उन्हें "ब्रह्मलोक यात्रा" और आध्यात्मिक जागरण का अनुभव हुआ, जिसे उन्होंने शब्दों में पिरो दिया। पुस्तक में कुल 43 अध्याय हैं और यह मनुष्य की 'मानने से जानने' की यात्रा पर केंद्रित होने का दावा करती है। उन्होंने आगे कहा, जो बातें इस ग्रंथ में हैं वह रामायण हो, महाभारत हो, वेद-पुराण, उपनिषद, बाइबल या कुरान में भी नहीं है।
जब उनसे पूछा गया यह किताब इतनी महंगी क्यों? इसपर उन्होंने कहा, इस किताब में दुखों के अंत और ईश्वर दर्शन के रास्ते को इस तरह से समझाया गया, जो अब तक किसी भी ग्रंथ में नहीं बताया गया है। उन्होंने दावा किया कि परम ब्रह्म का जो संदेश मिला, उसके बाद मैंने तय किया कि यह ग्रंथ जब दुनिया के सामने आएगी तो इसकी कीमत 15 करोड़ रुपये होगी।