भागवत ने राम मंदिर, भाजपा से रिश्ते, टैरिफ और 75 साल की उम्र में रिटायर के सवालों दिए जवाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 'संघ की 100 वर्ष की यात्रा: नए क्षितिज' विषय पर आयोजित कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम कई ऐसे सवालो का जवाब दिया, जिनके बारे अक्सर चर्चा होती रहती है। उनसे जब 75 साल की उम्र में रिटायर होने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कभी भी खुद के लिए न ही किसी और के लिए कहीं थी। बता दे, मोहन भागवत 11 सितंबर को 75 साल के होने जा रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल काफी उठ रहा है।
भाजपा से रिश्तों पर दिया जवाब
उन्होंने कहा, 'मैंने कभी नहीं कहा कि 75 होने पर मुझे या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए। संगठन तय करता है कि किसको कब क्या काम करना है। 80 वर्ष होने पर भी संगठन मुझे शाखा चलाने को कहेगा तो करना पड़ेगा।'
मोहन भागवत ने संघ और भाजपा के रिश्तों पर हुए सवाल के जवाब में कहा कि "ये हो ही नहीं सकता कि सब कुछ संघ तय करता है। मैं पिछले 50 साल से शाखा चला रहा हूँ, वो कई साल से राज्य चला रहे है।
टैरिफ के सवाल पर कहा- दोस्ती दबाव में नहीं
आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय व्यापार जरुरी है और होना भी चाहिए, क्योंकि यह देशों के बीच संबंधों को भी बनाए रखता है। लेकिन यह दबाव में नहीं होना चाहिए, दोस्ती दबाव में नहीं पनप सकती।’’ उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर होना चाहिए, साथ ही यह समझना चाहिए कि दुनिया परस्पर निर्भरता पर चलती है।
राम मंदिर आंदोलन का किया था समर्थन
उन्होंने कहा कि राम मंदिर एकमात्र ऐसा आंदोलन था, जिसका आरएसएस ने समर्थन किया, वह किसी अन्य आंदोलन (मथुरा-काशी) में शामिल नहीं होगा। लेकिन हमारे स्वयंसेवक इसमें शामिल हो सकते हैं। भागवत ने कहा कि संघ किसी पर भी, धार्मिक आधार पर हमला करने में विश्वास नहीं रखता है।