Lord Ganesha Story: इस वजह से भगवान गणेश को धारण करना पडा एक स्त्री का रुप !
इस साल 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर बुधवार का संयोग बन रहा है। बुधवार और चतुर्थी तिथि दोनों ही भगवान श्रीगणेश को अतिप्रिय हैं। सालों में एक बार बुधवार को गणेश चतुर्थी का संयोग बनता है। साथ ही इस दिन शुक्ल और शुक्ल नाम के 2 अन्य शुभ योग भी रहेंगे, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। वैसे इस खास मौके पर हम आपको बताएंगे एक ऐसा कारण था जिसके वजह से गणेश को धारण करना पडा एक स्त्री का रुप !
गणेशजी का स्त्री रुप – पुराणों में दर्ज एक कथा के अनुसार
दरअसल एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार अंधक नाम के दैत्य ने जबरन माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाने की कोशिश की, ऐसे में मां पार्वती ने सहायता के लिए अपने पति शिव जी को बुलाया.
अपनी पत्नी की इस दैत्य से रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने अपना त्रिशूल उठाया और उसके आर-पार कर दिया. लेकिन अंधक की मृत्यु नहीं हुई बल्कि त्रिशूल के प्रहार से उसके रक्त की एक-एक बूंद से राक्षसी अंधका का निर्माण होता चला गया.
यह देख माता पार्वती को एक बात तो समझ में आ गई थी और वो ये कि हर एक दैवीय शक्ति के भीतर दो तत्व मौजूद होते हैं. पहला पुरुष तत्व जो उसे मानसिक रूप से सक्षम बनाता है और दूसरा स्त्री तत्व, जो उसे शक्ति प्रदान करता है.
इसके बाद माता पार्वती ने उन सभी देवियों को आमंत्रित किया जो शक्ति का ही रूप हैं. उनके बुलाने पर हर दैवीय ताकत स्त्री रुप में वहां उपस्थित हो गईं और अंधक दैत्य के खून गिरने से पहले ही अपने भीतर समा लिया जिसके कारण राक्षसी अंधका का उत्पन्न होना कम हो गया.
लेकिन फिर भी अंधक के गिरते हुए रक्त को खत्म करना जब संभव नहीं हो रहा था तब भगवान गणेश को मैदान में उतरना पड़ा और वो भी अपने स्त्री रुप में.
विनायकी के रुप में प्रकट होकर गणेशजी ने अंधक का सारा रक्त पी लिया. इस तरह से गणेश समेत सभी दैवीय शक्तियों के स्त्री रुप की मदद से अंधका का सर्वनाश संभव हो सका.