You will be redirected to an external website

Lord Ganesha: इस गुफा में आज भी रखा है भगवान गणेश का कटा हुआ मानव मस्तक

Lord Ganesha: The severed human head of Lord Ganesha is still kept in this cave

Lord Ganesha: इस गुफा में आज भी रखा है भगवान गणेश का कटा हुआ मानव मस्तक

इस साल 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर बुधवार का संयोग बन रहा है। बुधवार और चतुर्थी तिथि दोनों ही भगवान श्रीगणेश को अतिप्रिय हैं। सालों में एक बार बुधवार को गणेश चतुर्थी का संयोग बनता है। साथ ही इस दिन शुक्ल और शुक्ल नाम के 2 अन्य शुभ योग भी रहेंगे, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। वैसे आज इस शुभ अवसर पर हम आपको एक बहुत ही रोचक जानकारी देने जा रहे है। 

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि गणेश को जीवन माता पार्वती ने दिया था, कहानियों की माने तो एक बार माता पार्वती स्नान ते लिए जा रही थी और तब अपने उपटन से उन्होने एक मानव आकृति बनाई थी, जिसमें उन्होने अपनी शक्तियों से प्राण प्रतिष्ठा की थी और फिर उस बालक को गणेश का नाम दिया था। स्नान के लिए जाने से पूर्व माता पार्वती ने गणेश को द्वार पर खड़े रहकर इस बात की निगरानी करने को कहा था कि कोई अंदर ना आने पाए।

भगवान गणेश का कटा हुआ मानव मस्तक

भगवान गणेश माता पार्वती के आदेश का पालन कर रहे थे और तभी वहां महादेव आ गए और उन्होने अंदर जाने का प्रयास किया। माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी ने उन्हे रोकने का प्रयास किया और इस बात पर महादेव को क्रोध आ गया।

दोनो पक्षों के बीच हुई बहस और घमासान का ये परिणाम हुआ कि भगवान शिव ने गणेश जी का सर धड़ से अलग कर दिया, जब माता पार्वती वहां पहुंची तो अपने पुत्र गणेश को इस अवस्था में देखकर वो बहुत क्रोधित हुई और इसके बाद उन्होने भगवान शिव से गणेश को पुर्नजीवन देने का हठ किया। माता पार्वती की इच्छा को पूरा करते हुए महादेव ने गणेश जी को हाथी का मस्तक लगाकर जीवित किया।

ये तो वो कथा है जिसके बारे में लगभग हम सभी जानते हैं लेकिन चलिए आज उस बारे में बात करते हैं जिस बारे में कोई नहीं जानता है, वो ये कि भगवान गणेश का मस्तक कटा और उसके बाद उन्हे हाथी का मस्तक लगाया गया लेकिन उनका कटा हुआ मस्तक कहां गया इस बारे में किसी को नहीं पता।

दरअसल, ऐसा कहा जाता है कि त्रिशूल का प्रहार इतना तेज़ था कि गणेश का मानव सिर धड़ से अलग होकर कैलाश पर्वत से बहुत दूर उत्तराखण्ड में गिरा, वहां ये सिर एक गुफा में सुरक्षित है।

ऐसा कहा जाता है कि इस गुफा के बारे में सबसे पहले त्रेतायुग में पता चला, जब सूर्यवंश के राजा रितुपर्णा अयोध्या में शासन कर रहे थे। स्कंदपुराण में एक जगह इस बात का वर्णन है कि एक बार राज जंगल में एक हिरण का पीछा कर रहे थे और जब वो थक गए तो एक पेड़ के नीचे आराम करने लगे जिसके बाद उन्हे नींद आ गई और नींद में सपना आया है कि सपने में उन्हें हिरण का पीछा ना करने की सलाह दी गई। सपना टूटने के बाद राजा एक गुफा के सामने खड़े थे। और जब राजा गुफा के अंदर गए तो उन्होंने देखा कि भगवान शंकर सहित 33 कोटि देवता गणेश के कटे हुए सिर की रक्षा कर रहे थे।

कहा जाता है कि द्वापर युग में पांडवों ने भी इस गुफा के बारे में खोज की और इसके बाद कलियुग में शंकराचार्य से इस गुफा का पता लगाया। ऐसी मान्यता है कि ये गुफा उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे पाताल भुवनेश्वर गुफा कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस गुफा में भगवान गणेश का सिर रखा हुआ है और इसके दर्शन मात्र से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
 

AUTHOR :KRISHNA SINGH

village of Rajasthan the bride and groom go to the crematorium immediately after marriage, know why Read Previous

राजस्थान के इस गांव में द...

Wastu tips: Before buying a new house, be careful of these Vastu defects, otherwise there will be a hindrance in happiness and peace Read Next

Wastu tips: नया घर लेने से पहले इ...